Thursday, February 2, 2023
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Up Ghaziabad News: प्रशासन की बडी लापरवाही, जमानत किसी और की रिहाई किसी और की

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Up Ghaziabad News: बिजली उपकरण और ट्रांसफार्मर चोरी के मामले में दो आरोपियों के खिलाफ हापुड़ के थाना सिंभावली से कार्रवाई किया गया। जिसके बाद डासना जेल में बंद दो बंदियों बाबू और ताराचंद ने पुलिस, अदालत और जेल प्रशासन सभी को गच्चा दे दिया।

दोनों आरोपियोंअपना नाम बदलकर जेल गए। अदालत ने 10 जनवरी को बाबू को जमानत दी लेकिन रिहाई ताराचंद की हो गयी। जब अदालत ने जेल में बंद दूसरे बंदी से पूछ ताछ किया तो उसने अपना असली नाम बता दिया। इस घटना के बाद पुरे मामले का खुलासा हुआ। डिप्टी जेलर ने उन दोनों आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराया है। कोर्ट ने अदालत से रिहा हुए ताराचंद को फिर से जेल भेजने के आदेश दिए हैं।

जेल अधीक्षक ने क्या कहा ?

जेल अधीक्षक आलोक सिंह ने कहा कि मूलरूप से स्टेशन कॉलोनी कासगंज निवासी और हाल में बृजघाट हापुड़ में रहने वाले ताराचंद और बाबू पुत्र छेम सिंह हाल जो रेलवे स्टेशन के पास गढ़मुक्तेश्वर के रहने वाले है। उन्हें न्यायालय के आदेश पर 17 दिसंबर 2022 को जेल में बंद किया गया।

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उस समय पुलिस के पास सिर्फ वारंट होता है और इसी के आधार पर बंदियों को जेल में प्रवेश दिया जाता है। साथ ही बंदियों का जेल में रिकॉर्ड भी इसी आधार पर रखा जाता है। 10 जनवरी को हापुड़ न्यायालय के रिहाई आदेश के बाद जेल रिकॉर्ड के अनुसार पहचान और चिन्ह मिलान करने के बाद बाबू पुत्र छेम सिंह को रिहा कर दिया गया।

वही 11 जनवरी को बंदी ताराचंद पुत्र भूप राम को न्यायालय ने माँग किया। इस पर जेल रिकॉर्ड के अनुसार ताराचंद को कोर्ट में पेश कर दिया गया।

जेल में जाते समय बदला था नाम

बंदी ने अपना नाम बाबू पुत्र छेम सिंह बताया था। पुलिस के पूछताछ में उसने बताया कि जेल में जाते समय दोनों ने साजिश करके आपस में नाम बदल लिया था। जेल में जाते समय पुलिस की पूछताछ में ताराचंद ने अपना नाम बाबू और बाबू ने अपना नाम ताराचंद बताया था।

जिसके बाद पुलिस ने इसी आधार पर दोनों का रिकॉर्ड दर्ज कर लिया था। मतलब बाबू को रिहा करना था और नाम बदलकर ताराचंद रिहा हो गया। एसीपी निमिष पाटिल ने जानकारी दी कि डिप्टी जेलर के कहने पर दोनों बंदियों के खिलाफ फर्जीवाड़ा करने की धारा में FIR दर्ज कर दिया गया है।

इस मामले की जांच हो रही है और पुलिस आरोपी को जल्दी पकड़ लेगी। पुलिस ने रिहाई के दौरान भी बंदी का आधार कार्ड नहीं मिलाया। इससे साफ होता है की पूरी गलती प्रशासन की है। प्रशासन की कमी के वजह से ही आरोपियों ने इस घटना को अंजाम दिया।

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