Tuesday, December 6, 2022
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प्रभात हत्याकांड: 22 साल से मां कर रही न्याय का इंतजार, गृह राज्यमंत्री टेनी के भाग्य का फैसला करेगा कोर्ट

मृतक प्रभात गुप्ता के भाई राजीव गुप्ता बताते हैं कि 8 जुलाई, 2000 का दिन मैं कभी नहीं भूल सकता हूं। भैया घर से दुकान जा रहे थे। तभी अजय मिश्र टेनी अपने साथी शशि भूषण, राकेश डालू और सुभाष मामा के साथ मौके पर पहुंचा। उसने मेरे भाई को रोका। कुछ अनबन हुई, उसके बाद गोली चली। पहली गोली अजय मिश्रा ने चलाई, जो सीधे जाकर मेरे भाई की कनपटी पर लगी।

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लखीमपुर: गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। प्रभात हत्याकांड में कोर्ट सोमवार को टेनी के भाग्य का फैसला करेगी। बता दें कि 22 साल पहले सरेबाज़ार प्रभात गुप्ता की गोली मारकर हत्या की गई थी। परिजनों के आरोपों के मुताबिक प्रभात की कनपटी पर पहली गोली टेनी ने ही मारी थी। इसके बाद प्रभात जमीन पर गिर पड़ा और उसकी मौत गई।

परिजनों ने बयां किया अपना दर्द
मृतक प्रभात गुप्ता के भाई राजीव गुप्ता बताते हैं कि 8 जुलाई, 2000 का दिन मैं कभी नहीं भूल सकता हूं। भैया घर से दुकान जा रहे थे। तभी अजय मिश्र टेनी अपने साथी शशि भूषण, राकेश डालू और सुभाष मामा के साथ मौके पर पहुंचा। उसने मेरे भाई को रोका। कुछ अनबन हुई, उसके बाद गोली चली। पहली गोली अजय मिश्रा ने चलाई, जो सीधे जाकर मेरे भाई की कनपटी पर लगी। दूसरी गोली सुभाष मामा ने चलाई, जो सीने पर लगी। मेरे भाई सड़क पर गिर गए। उनकी मौके पर मौत हो गई।

22 साल से चल रहा केस
साथ ही उनका कहना है कि अपने भाई के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए 22 साल से संघर्ष कर रहा हूं। जब लगता है कि आज फैसला हो जाएगा। उसी दिन सुनवाई की अगली डेट लग जाती है। राजीव बताते हैं कि मेरी मां मधु गुप्ता अब सिर्फ आरोपियों की सजा का इंतजार कर रही हैं। वह पूछती हैं कि हमें न्याय कब मिलेगा।

चार महीनों में चार बार टली सुनवाई
राजीव बताते हैं कि मेरे भाई प्रभात गुप्ता हत्याकांड में देश के गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी मुख्य आरोपी हैं। ऐसे में बार-बार सुनवाई टलने से मन में शंका होती है कि कहीं न कहीं वह अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर रहे हैं। क्योंकि जिस केस का फैसला 2018 में सुरक्षित कर लिया गया हो। उस पर अंतिम सुनवाई बीते चार महीनों में चार बार टल चुकी है।

ये था पूरा मामला
जानकारी के मुताबिक लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रनेता रहे प्रभात गुप्ता की आठ जुलाई 2000 को तिकुनिया में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसमें अजय मिश्र टेनी समेत चार लोग नामजद हुए थे। 29 मार्च 2004 को लखीमपुर न्यायालय से अजय मिश्र टेनी को दोषमुक्त कर दिया गया था। इसके खिलाफ मृतक के पिता संतोष गुप्ता ने रिवीजन हाईकोर्ट में दाखिल कर जिला न्यायालय के आदेश को चुनौती दी थी।

बार-बार टलती रही सुनवाई
2013 में चीफ जस्टिस के आदेश पर मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई और 2018 में डबल बेंच के सामने मुकदमे की सुनवाई पूरी हुई और आदेश सुरक्षित किया गया। छह माह बाद भी फैसला न आने पर मृतक के भाई राजीव गुप्ता ने फैसला न आने के कारण अपील दाखिल की, जिसमें बहस के बाद प्रभात हत्याकांड की सुनवाई फिर से करने का आदेश हुआ। इस बीच चार साल तक सुनवाई की तारीख नहीं मिली, जिससे जनवरी 2022 को सर्वोच्च न्यायालय में रिट दाखिल की गई। वहीं पुन: हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए आवेदन किया गया, जिस पर न्यायाधीश रमेश सिन्हा एवं सरोज यादव की डबल बेंच ने सात अप्रैल 2022 को सुनवाई के बाद 16 मई को फाइनल सुनवाई का आदेश दिया, लेकिन इस दिन टेनी के वकील छुट्टी पर चले गए।

इसके बाद 24 मई, फिर 31 मई 2022 की डेट लगी, लेकिन वकील छुट्टी पर चले गए। इस पर डबल बेंच ने 20 जुलाई को अंतिम सुनवाई लगाई गई, जिसमें टेनी की ओर से बताया गया कि उन के वकील सलिल श्रीवास्तव को कोविड संक्रमण हो गया है। इसलिए एक महीना बाद की तारीख दी जाए। इस पर वादी राजीव गुप्ता के वकील ज्योतेंद्र मिश्रा एवं सुशील कुमार सिंह ने आपत्ति जताई थी कि 11 जुलाई 2022 के आदेश में उल्लिखित है कि सलिल श्रीवास्तव बहस नहीं करेंगे, बल्कि गोपाल चतुर्वेदी अंतिम बहस करेंगे। इसलिए 20 जुलाई को ही सुनवाई की मांग की गई थी, लेकिन कोर्ट ने कोविड की रिपोर्ट मानते हुए अगली 22 अगस्त 2022 को अंतिम सुनवाई का आदेश जारी किया था।

सोमवार को होने वाली अंतिम सुनवाई के बाद आने वाले फैसले पर सभी की निगाहें लगी हुईं हैं। वादी राजीव गुप्ता ने कहा केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी को प्रभात गुप्ता की हत्या में सजा हो सकती है। इसलिए टेनी अंतिम सुनवाई को किसी तरह रोकने का प्रयास कर रहे हैं।

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